पंकज त्रिपाठी new

मिर्जापुर किंग उर्फ पंकज त्रिपाठी जीवन परिचय, परिवार और फिल्मी करियर के बारे में जानिए

पंकज त्रिपाठी जाने माने अभिनेताओ में गिने जाने वाले कलाकार हैं। इन्होंने ज्यादातर हिंदी फिल्में की हैं। इन्होंने 2004 में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और फ़िल्म रन, ओमकारा में एक छोटी भूमिका से शुरुआत की अब तक ये करीब 60 से अधिक फिल्मों में और 60 के करीब टेलीविजन शो में काम कर चुके हैं पर इन्हें सफलता 2012 में गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म श्रृंखला से मिली।

इनका जन्म 5 सितंबर 1976 को गांव बेलसंड, गोपालगंज के पास बिहार में हुआ था। ये 45 वर्ष के होनहार अभिनेता हैं। इनका राशिचिन्ह कन्या है। इनका होम टाउन गोपालगंज बिहार है।

इनकी प्रारंभिक शिक्षा डीपी एच स्कूल गोपालगंज, बिहार से हुई और आगे की पढ़ाई महाविद्यालय पटना से की फिर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी), दिल्ली से 2004 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से नाटक में स्नातक किया है।

पंकज त्रिपाठी new

लंबाई और बॉडी मेजरमेंट्स

पंकज जी काफी चुस्त और फिट रहते हैं इनकी हाइट की बात करे तो इनकी हाइट लगभग 178 सेंटीमीटर और मीटर में 1.78 मीटर है वही फिट में 5′ 10” है जो इनके वेट के अनुसार एक दम ठीक है इनका वजन लगभग 70 किलो है और पाउंड में 154 पाउंड है। इनकी आंखे भूरे रंग की हैं और इनके फेस पर अलग लुक लाती हैं। इनके बालो का रंग काला है जो इनके फेस को और आकर्षक बनाता है।

फिल्मी करियर

फ़िल्म इंडस्ट्री में इन्होंने 2004 से शुरुआत की इनकी पहली फ़िल्म थी रन (2004) और पहला टीवी शो गुलाल (2010) थी। इनके परिवार में इनके पिता पंडित बनारस तिवारी एक किसान हैं और माँ हेमवंती हैं इनके 3 बड़े भाई और 2 बड़ी बहनें हैं।

इनकी प्रेमिका की कोई जानकारी नहीं है। इन्होंने 15 जनवरी 2005 को मृदुला से विवाह कर लिया और इन्हें एक प्यारी बेटी आशी त्रिपाठी है।

हिन्दू धर्म में जन्मे पंकज को खाना पकाने , पढ़ने, यात्रा करने और संगीत सुनने का शौक है। इनकी पसन्द की बात करें तो इन्हें निर्देशक राम गोपाल वर्मा और अनुराग कश्यप पसंद हैं। अभिनेता में ये अमिताभ बच्चन को बेहद लाइक करेंते हैं।

इनकी लाइफ से जुड़े कुछ विशेष जानकारी की बात करें तो इनका जन्म बिहार के गोपालगंज के बेलसंड के एक छोटे से गाँव में हुआ जहां इनके पिता एक किसान का काम करते थे और इनके पिता बहुत ही धार्मिक व्यक्ति हैं।

ये बचपन में आरएसएस में शामिल हो गए और इसकी शाखाओं का दौरा करना शुरू कर दिया।

इनके घर मे टीवी न होने के कारण इन्हें 10वीं तक फिल्मों की जानकारी ही नहीं थी और नजदीकी थिएटर इनके गांव से बहुत दूर था लगभग 20 किमी जिस कारण ये बचपन मे फिल्मों से दूर रहें।

इनका बचपन से ही अभिनय की ओर झुकाव था और 12-14 साल की उम्र से ही इन्होंने अपने गांव में छठ महोत्सव में एक लड़की के रूप में प्रदर्शन करना शुरू कर किया।

इन्होने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद इनके पिता ने इन्हें आगे की पढ़ाई के लिए पटना भेज दिया क्यों की वहाँ अच्छे स्कूल नहीं थे।

पंकज के पिता चाहते थे कि वो एक सफल डॉक्टर बनें। ये पटना में पढ़ाई के दौरान एबीवीपी में शामिल हो गए और छात्र आंदोलनों में भाग लेने लगे। इतना ही नही ये पटना में अपने कॉलेज के सक्रिय छात्र नेता भी थे और एक वाक्पटु वक्ता भी थे।

ये खेलों में भी अच्छे थे और हाई जंप,100 मीटर स्प्रिंट में अपने कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया करते थे। इन्होंने होटल मैनेजमेंट में एक कोर्स भी किया और पटना के होटल मौर्य में दो साल तक कुक के रूप में काम भी किया था।

ये बहुत ही भावुक हैं एक बार लक्ष्मीनारायण लाल द्वारा अंधा कुआँ शीर्षक से एक प्रोसेनियम थिएटर देखने के बाद ये बेहद प्रभावित हुए शो देखने के बाद खूब रोए थे।

इनकी फ़िल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर की सफलता के बाद इन्हे कई फिल्म निर्माताओं से प्रस्ताव मिले। फुकरे, मांझी द माउंटेन मैन और मसान में इनके अभिनय को सभी ने सराहा।

ये जब पटना में थे तभी कला के प्रति अधिक आकर्षित हुए और ड्रामा शो और थिएटर में जाना शुरू किया और अभिनय से प्रभावित हो गए। इन्होंने साइकिल चालकों, ऑटो वालेस और कलाकारों से दोस्ती करना शुरू कर दिया और उनसे पूछा कि क्या वो भी अभिनय कर सकते हैं।

1995 में ये पहली बार विजय कुमार (एनएसडी पास आउट) द्वारा निर्देशित लीला नंदलाल की एक नाटक भीष्म साहनी की कहानी में दिखाई दिए। नाटक में उन्हें एक स्थानीय चोर का छोटा रोल मिला जिसे पंकज ने बहुत अच्छे से निभाया जिसे दर्शकों और मीडिया ने भी खूब पसंद किया।

1996 के बाद त्रिपाठी एक नियमित थिएटर आर्टिस्ट बन गए और 4 साल तक थिएटर किया। 2001 से 2004 तक इन्होंने एनएसडी में पढ़ाई की उसके बाद ये पटना लौट आए और 4 महीने तक थिएटर किया। 16 अक्टूबर 2004 को ये अपनी अभिनय की इच्छा को पूरा करने के लिए अपनी पत्नी के साथ मुंबई चले आये। 2004 से 2010 तक इन्होंने टाटा टी के लिए एक विज्ञापन सहित फिल्मों और टेलीविजन में कई छोटी भूमिकाएँ निभाई।

इनकी पत्नी ने भी मुंबई के गोरेगांव में पढ़ाना शुरू कर दिया। फिल्म में ये 2004 की फिल्म रन से नजर आये इसमें अभिषेक बच्चन और विजय राज ने अभिनय किया था। 2010 में इन्हें स्टार प्लस पर गुलाल नामक एक टीवी शो में एक भूमिका मिली इसकी शूटिंग के दौरान इन्हें मनोज बाजपेयी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजकुमार राव, ऋचा चड्ढा, हुमा कुरैशी और विनीत कुमार सिंह, आदि अभिनीत अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर के ऑडिशन के लिए कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा का फोन आया। अनुराग अपने ऑडिशन से खुश नहीं थे। हालांकि मुकेश छाबड़ा के कायल होने के बाद उन्होंने पंकज त्रिपाठी को ‘सुल्तान’ का रोल दिया।

Leave a Reply